एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त

एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त

देहरादून। मुख्य सेवक सदन, कैंट रोड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण में 212 महिलाओं को सहायता राशि की पहली किस्त जारी की गई। इसके अतिरिक्त 276 लाभार्थियों को दूसरी किस्त के रूप में एक करोड़ 20 लाख रुपए से अधिक दिए गए।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की एकल, निराश्रित, परित्यक्ता एवं विधवा महिलाओं को उनके गांव व क्षेत्र में ही स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की एकल व निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना हमारी सरकार की प्राथमिक प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं अपने ही क्षेत्र में रोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने योजना की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि आज द्वितीय चरण के अंतर्गत 8 जनपदों की 212 पात्र महिलाओं को स्वरोजगार हेतु प्रथम किस्त के रूप में सहायता राशि स्वीकृत कर दी गई है। इसके साथ ही, पूर्व में लाभान्वित 276 महिलाओं को सहायता राशि की दूसरी किस्त भी जारी की गई है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हमारी सरकार कृषि, पशुपालन, ब्यूटी पार्लर व सिलाई जैसे विभिन्न व्यवसायों हेतु 75 प्रतिशत तक का विभागीय अनुदान दे रही है। इस योजना के माध्यम से राज्य की महिलाएं न केवल स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।

योजना की प्रगति और आंकड़ों की बात करें तो 10 फरवरी 2026 को आयोजित प्रथम चरण में 6 जनपदों की 484 महिलाओं को सशक्त उद्यमी बनाने के उद्देश्य से ₹3,45,34,500 की 50 प्रतिशत प्रथम किस्त जारी की गई थी। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 22 जुलाई 2026 को आयोजित द्वितीय चरण के कार्यक्रम में अल्मोड़ा, चंपावत, चमोली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी एवं देहरादून की 212 नई पात्र महिलाओं के लिए ₹1,55,44,000 की प्रथम किस्त (50%) स्वीकृत की गई। इसके अतिरिक्त, प्रथम चरण की लाभार्थियों में से समीक्षा के उपरांत देहरादून (182), नैनीताल (71) एवं टिहरी (23) जनपद की कुल 276 महिलाओं को ₹1,20,76,875 की 30 प्रतिशत द्वितीय किस्त भी अवमुक्त कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 2 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर सरकार द्वारा 75 प्रतिशत का अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है, जबकि शेष 25 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी महिला का होता है।

इस अवसर पर विभागीय सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंसीलाल राणा, उपनिदेशक विक्रम सिंह, मोहित चौधरी, अंजना गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

मदद मिली तो आगरा का पेठा दून ले आई नीलू जैन
बुधवार को योजना के तहत दूसरी किस्त लेने आई कांवली रोड देहरादून निवासी नीलू जैन ने बताया कि 2022 में उनके पति की कैंसर से मृत्यु हो गई थी। इस योजना के तहत पहली किस्त के रूप में सहायता राशि मिलने के बाद उन्होंने पेठे की मिठाई बनाने का रोजगार शुरू किया। नीलू ने बताया कि उनका मायका आगरा है और वह आगरा के मशहूर पेठा बनाने की रेसिपी जानती थी । उन्होंने उसी गुणवत्ता और स्वाद वाली पेठे की मिठाई का कारोबार दून में खड़ा कर दिया है।

अपने साथ गरीब लड़कियों को भी रोजगार दे रही सुषमा थापा
सुषमा थापा ने बताया कि कोविड के दौरान उनके पति का देहांत हो गया और बाद में उनका 24 साल का बेटा भी दुनिया से चल बसा तो उनके ऊपर अचानक मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। सुषमा ने बताया कि इस योजना के तहत सहायता राशि मिलने के बाद उन्होंने हस्तशिल्प और सिलाई का काम शुरू किया । अब वे अपने साथ-साथ आस पड़ोस में रहने वाली गरीब लड़कियों को भी यह काम सिखा कर रोजगार दे रही हैं।

किस्मत और कैंसर से लड़कर भी खड़ा किया कारोबार
देहरादून के लक्खी बाग निवासी पूजा सेठी ने बताया कि शादी के बाद ससुराल में उन पर असहनीय अत्याचार किए गए, जिसके कारण वह अपने मायके आ गई। 2020 में उन्हें कैंसर हो गया। अपनी बदकिस्मती और कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए भी उन्होंने इस योजना के तहत सहायता राशि मिलने के बाद सिलाई का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि अब उनका कामकाज अच्छा चल रहा है और इसकी कमाई से न सिर्फ अपना इलाज करवा पा रही हैं, साथ ही उनकी गुजर बसर भी अच्छी हो रही है।

रोडपति से करोड़पति बनकर दिखाऊंगी
पिथौरागढ़ की बसंती देवी को भी बुधवार को सहायता राशि की पहली किस्त प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि वैवाहिक जीवन में जब उन्हें अपनी जिंदगी पर ही संकट आता दिखा तो उन्होंने खुद को पति से अलग कर लिया। ससुराल में उन्होंने अच्छा खासा बुटीक संचालित कर रखा था लेकिन फिर वह अचानक सड़क पर आ गई। बसंती ने बताया कि कई साल तक वह दूसरों की दुकानों में काम करके गुजारा करती रही। अब इस योजना के तहत सहायता मिलने के बाद वह फिर से अपना बुटीक का काम शुरू कर पाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी लगन और मेहनत के दम पर एक दिन रोडपति से करोड़पति तक का सफर तय करके दिखाएंगी