NEET UG फर्जी दस्तावेज मामले में एक और गिरफ्तारी, एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 5.58 लाख रुपये बरामद

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NEET UG फर्जी दस्तावेज मामले में एक और गिरफ्तारी, एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 5.58 लाख रुपये बरामद

देहरादून। NEET UG 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को वाहन समेत गिरफ्तार किया है। उसके पास से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

मामले में 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकार पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने और जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मुकदमे दर्ज किए गए थे। रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। जांच के दौरान एसआईटी ने संबंधित दस्तावेजों और अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लेकर उनकी जांच की। पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाने के बाद अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।

इस मामले में पुलिस ने इससे पहले 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये बरामद किए गए थे।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से टाटा नेक्सॉन कार बरामद की, जिसकी तलाशी के दौरान 5,58,100 रुपये नकद मिले। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे के माध्यम से कुछ छात्रों का एमबीबीएस में दाखिला कराने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘MBBS WAY’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत अन्य पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला कराने का काम करता था।

पुलिस के मुताबिक, धीरज की मुलाकात करीब दो साल पहले रूपेश पंडित से उत्तरकाशी स्थित मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।

जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि अरविंद ने अपनी बेटी और दो परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। आरोप है कि धीरज ने अपने एक अन्य संपर्क के माध्यम से कम मेरिट वाले छात्रों के दाखिले की जानकारी जुटाई। इसी दौरान उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत दाखिले की बात सामने आई।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद धीरज ने रूपेश और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बरामदगी:

  • धीरज श्रीवास्तव से 5,58,100 रुपये नकद
  • रूपेश पंडित की निशानदेही पर 8 लाख रुपये नकद
  • टाटा नेक्सॉन कार

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