राजमाता विजया राजे सिंधिया की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 100 रूपये के विशेष स्मारक सिक्के का विमोचन किया।
MY BHARAT TIMES, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राजमाता विजया राजे सिंधिया की 100वीं जयंती पर 100 रूपये के विशेष स्मारक सिक्के का विमोचन किया। वीडियो कांफ्रेंस से आयोजित इस समारोह में सिंधिया परिवार के सदस्यों के साथ-साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपालों सहित देश के अन्य भागों से कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर राजघराने की राजमाता होने के साथ-साथ भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक रही थीं। वह पांच बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा की सदस्य निर्वाचित हुई थीं। विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को मध्य प्रदेश के सागर में हुआ था। उनके बेटे माधव राव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे थे। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया उनकी पुत्री हैं। माधव राव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा एकता यात्रा के समय विजया राजे सिंधिया जी ने मेरा परिचय गुजरात के युवा नेता नरेन्द्र मोदी के तौर पर कराया था, इतने वर्षों बाद आज उनका वही नरेन्द्र देश का प्रधानसेवक बनकर उनकी अनेक स्मृतियों के साथ आपके सामने है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विजयाराजे सिंधिया जी ने अपना जीवन गरीबों के लिए समर्पित किया। उनके लिए राजसत्ता नहीं बल्कि जन सेवा अहम थी। नारी शक्ति के बारे में वो कहती थी कि जो हाथ पालने का झुला सकते हैं, तो वे विश्व पर राज भी कर सकते हैं। आज नारी शक्ति हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और देश का नाम रोशन कर रही हैं। विजयाराजे सिंधिया एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व थी। साधना, उपासना , भक्ति उनके अन्तर्मन में रची बसी थी। जेल में रहते हुए उन्होंने कहा था कि अपनी भावी पीढ़ियों को सीना तान कर जीने की प्रेरणा मिले इस उद्देश्य से हमें आज की विपदा को धैर्य के साथ झेलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई भी साधारण व्यक्ति जिसके अदंर योग्यता , प्रतिभा व देश की सेवा की भावना है, वह इस लोकतंत्र में भी सत्ता को सेवा का माध्यम बना सकता है। जन सेवा के लिए किसी खास परिवार में ही जन्म लेना जरूरी नहीं हैं। राष्ट्र के भविष्य के लिए राजमाता ने अपना वर्तमान समर्पित कर दिया था। उन्होंने पद एवं प्रतिष्ठा के लिए न जीवन जिया और न ही राजनीति की। स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर आजादी के कई दशकों तक भारतीय राजनीति के हर अहम पड़ाव की वे साक्षी रहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि विजया राजे जी ने एक पुस्तक में लिखा है कि एक दिन ये शरीर यहीं रह जायेगा। आत्मा जहाँ से आई है, वहीं चली जायेगी। शून्य से शून्य में, स्मृतियाँ रह जायेंगी। अपनी इन स्मृतियों को मैं उनके लिए छोड़ जाऊँगी, जिनसे मेरा सरोकार रहा है, जिनकी मैं सरोकार रही हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूँ कि उनकी स्मृति में मुझे विशेष स्मारक सिक्के के अनावरण का अवसर मिला। इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, अन्य राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं अन्य जन प्रतिनिधिगण जुड़े रहे।
