‘राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण’ संस्थान के फिटनेस कोच नरेश नयाल ने खाकी द्वारा कोरोना के खिलाफ अभियान को एक कविता समर्पित की
माई भारत टाईम्स, देहरादून। संकट की इस घड़ी में कोरोना वारियर्स (पुलिस, डाॅक्टर्स, नर्सेस, सफाई कर्मचारी, बैंक कर्मचारी, व अन्य स्टाफ) जो हम सभी के लिये दिन-रात काम में लगा हुआ है, उनको शत्-शत् नमन। इस समय अपने परिवार को छोड़कर, छोटे-छोटे बच्चों व बुजुर्ग माता-पिता, दादा-दादी हो या छोटे भाई-बहिन सबको छोड़कर ये वारियर्स देश सेवा में लगे हुये हैं। हमें इन सभी का सम्मान करना चाहिये। इन्हीं वारियर्स में से एक पुलिस भी है, जिसका इस संकट की घडी में अहम रोल है, जिसे वह बखूबी निभा भी रहे हैं। उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा कोरोना के खिलाफ अभियान को देखते हुये राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन संस्थान के फिटनेस कोच नरेश नयाल ने उनके सम्मान में एक कविता प्रेषित की है, जो इस प्रकार है –
मैं सख्त दिखता जरूर हूँ,
और सच मानो तो हूँ भी,
पर कवच मेरा खाकी है,
हौंसला भी खाकी है,
कर्तव्य और मूल खाकी है,
हाँ अपनी खाकी पर मुझे गर्व है,
सूरत बदली समाज की,
तो मैं अलग दिखता हूँ,
हुई जरा भी खलबली कहीं,
तो मैं कमर कस लेता हूँ,
विपदा आई किसी पर भी,
तो तुरंत हाजिर हो जाता हूँ,
हाँ जनाब कोई कुछ भी कह ले,
मैं हमेशा कर्तव्यनिष्ठ रहता हूँ,
भूखण्ड भी समतल नहीं,
पर मैं जमा रहता हूँ,
उत्तराखण्ड के कोने-कोने में,
मैं पहुँच जाता हूँ,
जनता का कष्ट मेरा अपना है,
मेरा परिवार के संग होना तो,
मानो कभी-कभी सपना है,
घरों में महफूज जनता है,
मैं सडकों और पहाड़ों में हूँ,
फिर विपदा कोई भी आये,
मैं समाज की ढ़ाल बने खड़ा हूँ,
तुम कुछ दिन और स्वर्ग(घर) में,
सावधानी से ठहर जाओ,
मैं बाहर इससे लड़ रहा हूँ,
जिसे ‘कोरोना’ कहते हैं,
उससे आँख मिलाये हुये हूँ,
हाँ! जी हाँ सुन लो ‘उत्तराखण्डियो’,
और सारे जहान वालो,
मैं! मैं ‘उत्तराखण्ड़ पुलिस’ हूँ।
साभार: नरेश सिंह नयाल (पी॰ई॰आई॰)
इन आई॰वी॰एच॰
116, राजपुर रोड़, देहरादून।
